दाखिल-खारिज (Property Mutation / नामांतरण) की पूरी कानूनी प्रक्रिया

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द्वारा , संस्थापक, फॉर्मसूत्र · अपडेट: September 2026 · 9 min read

रजिस्ट्री (Sale Deed) और दाखिल-खारिज में कानूनी अंतर, तहसीलदार न्यायालय की प्रक्रिया, ऑनलाइन भूलेख पोर्टल और पैतृक वरासत दर्ज कराने के नियम।

उप-पंजीयक (Sub-Registrar) कार्यालय में बैनामा (रजिस्ट्री) कराने से संपत्ति का मालिकाना हक तो मिलता है, परंतु सरकारी राजस्व अभिलेखों में स्वतः नाम दर्ज नहीं होता। दाखिल-खारिज (Mutation) वह वैधानिक प्रक्रिया है जिससे सरकारी खतौनी/जमाबंदी में पुराने मालिक का नाम काटा (खारिज) जाता है और नए खरीदार का नाम दर्ज (दाखिल) किया जाता है।

मुख्य जानकारी

सक्षम प्राधिकारीतहसीलदार / नायब तहसीलदार / नगर निगम जोनल अधिकारी
संबंधित कानूनराज्य भू-राजस्व संहिता / नगर निगम अधिनियम
सार्वजनिक आपत्ति अवधि30 से 45 दिनों की वैधानिक समय सीमा
ऑनलाइन पोर्टलराज्य भूलेख पोर्टल / राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (RCMS)
नामांतरण में लगने वाला समय35 से 60 कार्य दिवस

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

  1. रजिस्ट्री (बैनामा) और दाखिल-खारिज का अंतर समझें

    रजिस्ट्री केवल क्रेता और विक्रेता के मध्य हुआ संविदात्मक लेनदेन है। परंतु सरकार और राजस्व विभाग केवल उसी व्यक्ति को जमीन का कानूनी स्वामी मानता है जिसका नाम सरकारी खतौनी (Record of Rights) में दर्ज हो। दाखिल-खारिज न कराने पर पुराना विक्रेता उस भूमि पर बैंक लोन ले सकता है या दोबारा धोखाधड़ी कर सकता है।

  2. दाखिल-खारिज का प्रकार पहचानें

    • बैनामा के आधार पर दाखिल-खारिज: जमीन अथवा मकान खरीदने के तुरंत बाद। • वरासत / उत्तराधिकार के आधार पर दाखिल-खारिज: परिवार के मुखिया के निधन के बाद कानूनी वारिसों के नाम खतौनी दर्ज कराना। • वसीयत या न्यायालय आदेश के आधार पर: पारिवारिक बंटवारे या सिविल कोर्ट की डिक्री के अनुसार।

  3. राज्य राजस्व पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करें

    अधिकांश राज्यों में अब दाखिल-खारिज ऑनलाइन अनिवार्य है (जैसे उत्तर प्रदेश में vaad.up.nic.in, मध्य प्रदेश में सारा, महाराष्ट्र में महाभूमि, बिहार भूमि आदि)। अपना जिला, तहसील, ग्राम व खसरा/गाटा संख्या दर्ज करें, रजिस्टर्ड बैनामे की पीडीएफ अपलोड करें और शुल्क जमा करें।

  4. सार्वजनिक इश्तेहार (30-दिवसीय आपत्ति सूचना) जारी होना

    तहसीलदार न्यायालय द्वारा 30 से 45 दिनों का सार्वजनिक इश्तेहार (नोटिस) जारी किया जाता है। यदि इस अवधि में कोई व्यक्ति कानूनी आपत्ति दर्ज नहीं करता, तो क्षेत्रीय लेखपाल/पटवारी मौके पर भौतिक कब्जे की आख्या (सत्यापन रिपोर्ट) न्यायालय में प्रस्तुत करता है।

  5. तहसीलदार द्वारा नामांतरण आदेश व अद्यतन खतौनी जारी होना

    तहसीलदार औपचारिक नामांतरण आदेश पारित करते हैं। राजस्व कंप्यूटर में विक्रेता का नाम हटाकर क्रेता का नाम जोड़ दिया जाता है। इसके पश्चात आप भूलेख पोर्टल से डिजिटल हस्ताक्षरित नई खतौनी तुरंत डाउनलोड कर सकते हैं।

आवश्यक दस्तावेज

स्टांप पेपर और नोटरी नियम

दाखिल-खारिज आवेदन के साथ ₹10 से ₹100 के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर नोटरी सत्यापित शपथ पत्र संलग्न किया जाता है। सरकारी नामांतरण शुल्क राज्य के नियमों अनुसार ₹100 से ₹1,000 तक होता है।

आधिकारिक पोर्टल और लिंक

आम गलतियाँ और उनसे बचने के उपाय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यदि 30 दिन की नोटिस अवधि में कोई आपत्ति दाखिल कर दे तो क्या होगा?

यदि कोई सह-खातेदार या अन्य व्यक्ति आपत्ति दर्ज करता है, तो मामला निर्विरोध से 'वाद' (विवादित मुकदमा) में बदल जाता है। तहसीलदार दोनों पक्षों के मूल दस्तावेज और मौके पर भौतिक कब्जे की जांच कर गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाते हैं।

क्या बिना दाखिल-खारिज के संपत्ति दोबारा बेची जा सकती है?

नहीं। भले ही आपके पास बैनामा हो, लेकिन नया खरीदार या बैंक से होम लोन लेने वाला व्यक्ति अनिवार्य रूप से खतौनी में आपका नाम दर्ज मांगता है। दाखिल-खारिज के बिना संपत्ति की बिक्री में गंभीर कानूनी अड़चनें आती हैं।

संबंधित फॉर्म और आवेदन पत्र

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