पैतृक कृषि भूमि बंटवारा (खातौनी व कुर्रा तरमीम): 45 दिनों में अलग खतौनी पाने की कानूनी प्रक्रिया (राजस्व संहिता धारा 116)

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द्वारा , संस्थापक, फॉर्मसूत्र · अपडेट: October 2026 · 9 min read

एसडीएम कोर्ट में आपसी सहमति या विवादित बंटवारा वाद, लेखपाल द्वारा कुर्रा (नक्शा तरमीम) तैयार करने और अलग खाता संख्या जारी कराने की सम्पूर्ण विधिक गाइड।

संयुक्त खातेदार किसान अक्सर फसल, केसीसी लोन, सरकारी मुआवजे और मुख्य सड़क के कीमती फ्रंट को लेकर विवाद का सामना करते हैं। राज्य राजस्व संहिता (जैसे यूपी राजस्व संहिता 2006 की धारा 116 या एमपी भू-राजस्व संहिता धारा 178) के तहत प्रत्येक सह-खातेदार को अपनी भूमि का विधिक विभाजन कराकर 45 से 90 दिनों में स्वतंत्र खतौनी और नक्शा तरमीम प्राप्त करने का पूर्ण वैधानिक अधिकार प्राप्त है।

मुख्य जानकारी

लागू कानूनराज्य भू-राजस्व संहिता धारा 116 / 117 एवं राजस्व नियमावली नियम 107–109
सक्षम न्यायालयउपजिलाधिकारी (SDM / Assistant Collector First Class)
कोर्ट फीस व स्टाम्पसाधारण नाममात्र कोर्ट फीस (विभाजन के बाद केवल अंतिम डिक्री पर स्टाम्प शुल्क)
प्रक्रिया समय-सीमाआपसी सहमति: 45–60 दिन | विवादित वाद: 90–180 दिन
अंतिम परिणामप्रपत्र 24 पर लेखपाल का कुर्रा नक्शा, अलग खतौनी खाता संख्या और नामांतरण

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

  1. विभाजन का प्रकार चुनें: आपसी सहमति बंटवारा बनाम धारा 116 राजस्व वाद

    यदि सभी भाई व सह-खातेदार सहमत हैं, तो उप-पंजीयक (Sub-Registrar) के समक्ष पंजीकृत पारिवारिक विभाजन विलेख (Registered Family Partition Deed) निष्पादित करें अथवा एसडीएम कोर्ट में धारा 116 के तहत संयुक्त सहमति प्रार्थना पत्र दें। यदि कोई एक भाई बंटवारे से मना कर रहा है या सड़क की कीमती जमीन पर अकेले कब्जा जमाए हुए है, तो सीधे एसडीएम कोर्ट में वाद दायर करें।

  2. एसडीएम कोर्ट (उपजिलाधिकारी) में धारा 116 का वाद पत्र (Plaint) दायर करें

    अधिवक्ता के माध्यम से धारा 116 का वाद पत्र तैयार कराएं। इसमें सभी गाटा/खसरा संख्या, कुल रकबा, चौहद्दी और प्रत्येक सह-खातेदार का विधिक अंश (प्रतिशत) स्पष्ट रूप से दर्ज करें। वाद पत्र में ग्राम सभा और राज्य सरकार को आवश्यक पक्षकार (Formal Party) बनाना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

  3. समन तामीली, आपत्ति एवं प्रारंभिक डिक्री (Preliminary Decree)

    न्यायालय द्वारा सभी सह-खातेदारों को समन जारी कर आपत्ति (Objection) हेतु 30 दिन का समय दिया जाता है। कोई विवाद न होने पर अथवा दोनों पक्षों की सुनवाई उपरांत एसडीएम न्यायालय प्रारंभिक डिक्री पारित करता है, जिसमें प्रत्येक पक्षकार का कानूनी अंश (जैसे 1/2, 1/3, 1/4) निर्धारित कर दिया जाता है।

  4. लेखपाल द्वारा स्थलीय जांच, मूल्यांकन एवं कुर्रा तरमीम (Form 24) तैयार होना

    प्रारंभिक डिक्री के बाद एसडीएम लेखपाल को मौके पर जाकर कुर्रा (भौतिक विभाजन) बनाने का आदेश देते हैं। नियम 108 के अनुसार लेखपाल को सड़क किनारे की कीमती भूमि, नहरी पानी के रास्ते और पीछे की जमीन का सभी भाइयों में समानुपातिक व न्यायसंगत विभाजन करना होता है। लेखपाल रंगीन नक्शे (कुर्रा) सहित प्रपत्र 24 पर अपनी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करता है।

  5. कुर्रे पर आपत्ति निस्तारण, अंतिम डिक्री (Final Decree) एवं पृथक खतौनी

    यदि लेखपाल ने किसी पक्षकार को सड़क से वंचित कर दिया है, तो आप तुरंत लिखित आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। न्यायालय द्वारा कुर्रा स्वीकार होने पर स्टाम्प शुल्क जमा कराया जाता है और अंतिम डिक्री पारित होती है। इसके पश्चात तहसीलदार को परवाना अमलदरामद जारी होता है और प्रत्येक भाई की स्वतंत्र खतौनी व अलग खाता संख्या जारी कर दी जाती है।

आवश्यक दस्तावेज

स्टांप पेपर और नोटरी नियम

धारा 116 वाद दायर करते समय केवल सामान्य नाममात्र कोर्ट फीस (₹10 से ₹50 के कोर्ट फीस टिकट) लगती है। परंतु जब वाद का फैसला होता है और अंतिम डिक्री (Final Decree) बनाई जाती है, तब भारतीय स्टाम्प अधिनियम की अनुसूची 1-बी (अनुच्छेद 45) के तहत कृषि भूमि के सर्किल रेट अथवा राजस्व मूल्यांकन के अनुसार स्टाम्प paper जमा करना अनिवार्य होता है।

आधिकारिक पोर्टल और लिंक

आम गलतियाँ और उनसे बचने के उपाय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या बिना बंटवारे के कोई भाई पैतृक जमीन में से सड़क वाला हिस्सा बेच सकता है?

नहीं, बिल्कुल नहीं। जब तक वैधानिक रूप से कुर्रा बनाकर विभाजन नहीं हो जाता, तब तक कोई भी भाई केवल अपना अविभाजित प्रतिशत बेच सकता है, सड़क का कोई खास टुकड़ा नहीं। यदि वह चौहद्दी लिखकर बेचता है तो वह बैनामा न्यायालय द्वारा रद्द कराया जा सकता है।

आपसी सहमति से धारा 116 के तहत जमीन बंटवारे में कितना समय लगता है?

यदि सभी सह-खातेदार एसडीएम कोर्ट में उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कर देते हैं और कुर्रे पर कोई आपत्ति नहीं करते, तो 45 से 60 दिनों के भीतर अलग खतौनी और नक्शा तरमीम हो जाता है।

यदि लेखपाल ने सड़क का पूरा हिस्सा दूसरे भाई को दे दिया हो तो क्या करें?

आपको अंतिम डिक्री पारित होने से पूर्व एसडीएम कोर्ट में लेखपाल के प्रपत्र 24 कुर्रे के खिलाफ औपचारिक विधिक आपत्ति (Objection) दाखिल करनी होगी। कोर्ट लेखपाल को पुनः नाप कर सड़क का फ्रंट समान अनुपात में विभाजित करने का आदेश देगी।

संबंधित फॉर्म और आवेदन पत्र

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