बिजली मीटर में नाम कैसे बदलवाएं: मीटर ट्रांसफर की पूरी कानूनी व तकनीकी प्रक्रिया
द्वारा शिवम तिवारी, संस्थापक, फॉर्मसूत्र · अपडेट: September 2026 · 8 min read
मकान/दुकान की खरीद अथवा स्वामी की मृत्यु के बाद डिस्कॉम (UPPCL, BSES, TPDDL, PSPCL, MSEDCL आदि) में नाम परिवर्तन, ₹100 स्टाम्प पर क्षतिपूर्ति बांड (Indemnity Bond) व एनओसी नियम।
घर, फ्लैट अथवा दुकान खरीदने या मूल स्वामी के निधन के बाद बिजली के मीटर में अपना नाम दर्ज कराना अत्यंत आवश्यक है। यह वैध निवास प्रमाण बनता है और भविष्य के कानूनी विवादों से बचाता है। यदि पुराना उपभोक्ता जीवित है तो एनओसी मार्ग लिया जाता है, और यदि निधन हो गया है तो वारिसाना/उत्तराधिकार मार्ग अपनाया जाता है।
मुख्य जानकारी
| संबंधित विभाग | राज्य विद्युत वितरण कंपनी (DISCOM / बिजली बोर्ड) |
|---|---|
| क्षतिपूर्ति बांड हेतु स्टाम्प शुल्क | ₹100 का गैर-न्यायिक (Non-Judicial) स्टाम्प पेपर |
| अनिवार्य पूर्व शर्त | वर्तमान उपभोक्ता संख्या पर बकाया बिल शून्य होना चाहिए |
| आवेदन माध्यम | डिस्कॉम ऑनलाइन पोर्टल / ई-डिस्ट्रिक्ट / उप-संभाग (SDO) कार्यालय |
| प्रक्रिया में लगने वाला समय | 10 से 20 कार्य दिवस |
चरण-दर-चरण प्रक्रिया
विद्युत मीटर का समस्त बकाया बिल शून्य (Clear) करें
नाम परिवर्तन आवेदन करने से पूर्व वर्तमान उपभोक्ता संख्या (Consumer ID / CA No.) पर दर्ज अंतिम बिजली बिल का पूर्ण भुगतान करें। यदि ₹1 भी बकाया या सरचार्ज बाकी होगा, तो डिस्कॉम का सॉफ्टवेयर नाम ट्रांसफर आवेदन को तुरंत निरस्त कर देता है।
नाम परिवर्तन की सही श्रेणी चुनें
• स्थिति 1: जीवित विक्रेता से संपत्ति की खरीद: पुराने मालिक द्वारा हस्ताक्षरित अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और पंजीकृत बैनामा (Sale Deed) संलग्न करें। • स्थिति 2: मूल खाताधारक का निधन हो जाने पर: दिवंगत स्वामी का मृत्यु प्रमाण पत्र, कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) और अन्य वारिसों का सहमति पत्र संलग्न करें। • स्थिति 3: पुराने मालिक की एनओसी न मिलने पर: यदि पुराना मालिक उपलब्ध नहीं है, तो ₹100 के स्टाम्प पेपर पर क्षतिपूर्ति बांड (Indemnity Bond) देकर सीधे स्वामित्व के आधार पर नाम बदला जा सकता है।
₹100 के स्टाम्प पेपर पर क्षतिपूर्ति बांड (Indemnity Bond) तैयार करवाएं
डिस्कॉम के निर्धारित प्रारूप पर ₹100 के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर क्षतिपूर्ति बांड बनवाएं और नोटरी से सत्यापित कराएं। इसमें आवेदक घोषणा करता है कि वह परिसर का वैध स्वामी/अधिभोगी है और भविष्य में किसी भी पुराने बकाये या कानूनी दावे की भरपाई स्वयं करेगा।
डिस्कॉम पोर्टल पर ऑनलाइन या उप-संभाग कार्यालय में आवेदन जमा करें
अपने राज्य के बिजली पोर्टल (जैसे UPPCL झटपट पोर्टल, BSES दिल्ली पोर्टल, महाराष्ट्र महावितरण, पीएसपीसीएल आदि) पर लॉग इन करें। 'Name Transfer / Ownership Change' विकल्प चुनकर बैनामा (Registry), अद्यतन बिजली बिल, क्षतिपूर्ति बांड व आधार कार्ड अपलोड करें और निर्धारित नाम ट्रांसफर शुल्क (सामान्यतः ₹100 से ₹300) का भुगतान करें।
कनिष्ठ अभियंता (JE) द्वारा स्थलीय निरीक्षण व मीटर रीडिंग जांच
क्षेत्रीय कनिष्ठ अभियंता (JE) अथवा लाइनमैन परिसर का भौतिक निरीक्षण करता है, मीटर की सील संख्या का मिलान करता है, वर्तमान मीटर रीडिंग दर्ज करता है और स्वीकृत विद्युत भार (Sanctioned Load) का सत्यापन करता है।
नए उपभोक्ता के नाम से आगामी बिल जारी होना
उप-संभागीय अधिकारी (SDO) अथवा अधिशासी अभियंता (XEN) द्वारा स्वीकृति दिए जाने के बाद कंप्यूटर लेजर में आपका नाम दर्ज हो जाता है। अगले महीने से बिजली का बिल आपके नाम से आने लगता है।
आवश्यक दस्तावेज
- अंतिम जमा किए गए बिजली बिल की प्रति (शून्य बकाया सहित)
- संपत्ति स्वामित्व का प्रमाण (पंजीकृत बैनामा / Sale Deed / दाखिल-खारिज / रजिस्ट्री प्रति)
- आवेदक का पहचान पत्र (आधार कार्ड / पैन कार्ड / मतदाता पहचान पत्र)
- ₹100 के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर नोटरी द्वारा सत्यापित क्षतिपूर्ति बांड (Indemnity Bond)
- पुराने उपभोक्ता का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) (यदि विक्रेता जीवित व उपलब्ध हो)
- यदि पुराना उपभोक्ता दिवंगत है: मूल मृत्यु प्रमाण पत्र व वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir)
- पैतृक संपत्ति होने पर: अन्य सभी सह-उत्तराधिकारियों का सहमति शपथ पत्र
- स्वीकृत लोड टेस्ट रिपोर्ट (यदि मीटर का लोड भी बढ़ाया जा रहा हो)
स्टांप पेपर और नोटरी नियम
बिजली बोर्ड के पक्ष में दिया जाने वाला क्षतिपूर्ति बांड (Indemnity Bond) अनिवार्य रूप से ₹100 के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर (या ई-स्टाम्प) पर प्रिंट कराकर नोटरी पब्लिक से अटेस्टेड होना चाहिए। सह-वारिसों की एनओसी ₹10/₹50 के स्टाम्प पेपर पर दी जाती है।
आधिकारिक पोर्टल और लिंक
- राष्ट्रीय विद्युत पोर्टल (Ministry of Power)
- उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन (UPPCL झटपट पोर्टल)
- दिल्ली बिजली पोर्टल (BSES Rajdhani / Yamuna)
- महाराष्ट्र महावितरण (MSEDCL Portal)
आम गलतियाँ और उनसे बचने के उपाय
- बकाया बिल जमा किए बिना आवेदन करना: ₹5 का भी विलंब अधिभार (LPSC) शेष होने पर सिस्टम आवेदन खारिज कर देगा।
- स्वर्गीय पिता/माता के मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र न लगाना: यदि मूल उपभोक्ता का निधन हो गया है, तो सामान्य खरीद-बिक्री वाला फॉर्म स्वीकार नहीं होता।
- सादे कागज पर बांड देना: क्षतिपूर्ति बांड अनिवार्यतः ₹100 के वैधानिक स्टाम्प पेपर पर नोटरी मुहर सहित ही मान्य होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
क्या किराएदार बिजली मीटर में अपना नाम करवा सकता है?
नहीं। किराएदार बिजली मीटर का मालिकाना हक अपने नाम नहीं करवा सकता। मीटर हमेशा संपत्ति के मालिक के नाम पर ही होता है। किराएदार केवल मकान मालिक की लिखित एनओसी और रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट के आधार पर अपने उपयोग हेतु अलग सब-मीटर का प्रावधान कर सकता है।
पुराने उपभोक्ता द्वारा जमा की गई सिक्योरिटी डिपॉजिट का क्या होता है?
यदि पुराना उपभोक्ता सिक्योरिटी ट्रांसफर की एनओसी देता है, तो वह सिक्योरिटी नए खाते में जोड़ दी जाती है। अन्यथा नए उपभोक्ता को वर्तमान टैरिफ दरों के आधार पर नई सिक्योरिटी राशि जमा करनी होती है।